क्या समाज की यह संवेदनहीनता स्वागतयोग्य है?

मुंबई में कमला मिल्स कंपाउंड के एक बीयरबार में आग लगी दर्जनभर से ज्यादा लोग मारे गये। लेकिन न तो फेसबुक के यूजर्स ने नोटिस लिया और न ही ट्वीटर पर इस खबर को लेकर किसी प्रकार का ट्रेन्ड बना। न संवेदना प्रकट की गयी और न ही मरनेवालों के लिए शोकाकुल संदेशों की बाढ़ आयी।

जबकि दूसरी तरफ आनलाइन अंग्रेजी खबरों में यह खबर दो दिनों तक शीर्ष पर बनी रही। छिद्रान्वेषण भी किया गया और बीएमसी द्वारा की जा रही कार्यवाहियों का अपडेट भी बताया गया। लेकिन ऐसा क्यों हुआ कि सिर्फ अंग्रेजी और अंग्रेजियत वाला समुदाय ही इस दुर्घटना को लेकर चिंतित हुआ? ऐसा क्यों हुआ कि सोशल मीडिया इस हादसे के प्रति संवेदनशील नहीं दिखा? क्या इसलिए यह एक बीयरबार में घटी घटना है जहां कुछ लोग मौज मस्ती करने के लिए इकट्ठा हुए थे और हादसे का शिकार हो गये? या फिर यही वह अर्बन अपर क्लास और लोअर क्लास का डिवीजन है जो इन दोनों को अलग थलग कर चुका है।

ऐसा नहीं है कि सोशल मीडिया की यह अनभिज्ञता बुरी लग रही है। वो भी तो यही करते हैं जब किसी गरीब की मौत होती है तो कहां उनकी पार्टी रुकती है? कब देश और समाज पर आई किसी विपत्ति ने उनकी अय्याशियों पर रोक लगाया है? यह हमारे समाज का एक ऐसा एलियन तबका बन गया है जो बाकी सबसे कटकर रहता है। वह अमेरिका और ब्रिटेन से तो जुड़ा होता है लेकिन उसके पड़ोस वाली बस्ती से उतना ही दूर रहता है जितना अमेरिका से भारत दूर है।

पहली बार ऐसा लग रहा है कि अगर गरीब की मौत से अमीर को फर्क नहीं पड़ता तो अमीर की मौत से भी गरीब को कोई फर्क नहीं पड़ता। दुखद तो है लेकिन अमीर के प्रति गरीब की यह संवेदनहीनता स्वागत योग्य है।

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