अर्थ अनर्थ

राफेल डील में कुछ भी काला नहीं है

भारत ने फ्रांस के जिस राफेल विमान का समझौता किया है उसका रंग हल्का काला या मटमैला है। कांग्रेस को लगता है कि जैसे विमान का रंग मटमैला है वैसे ही डील में भी कुछ काला है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सदन में खड़े होकर कहा भी है कि डील में काला है, लेकिन कांग्रेस ने गलत जगह हाथ डाल दिया है। हो सकता है कांग्रेस के नेता ये सोच रहे हों कि एक रक्षा सौदे घोटाले में राजीव गांधी की कुर्सी गयी तो दूसरे रक्षा सौदे के कथित “घोटाले” को उजागर करके वो राहुल गांधी के लिए कुर्सी हासिल कर लेंगे, लेकिन ऐसा होगा नहीं।

उन्हें मालूम होना चाहिए कि उनका पाला किससे पड़ा है। रक्षा सौदों में दलाली सौदे का ही एक मानक व्यवहार है। इसलिए रक्षा सौदों में पैसे का लेन देन होता है। कांग्रेस करती भी रही है। और इस समझौते के वक्त कांग्रेसी होते तो शायद एक बार फिर सीधे पैसा पकड़ लेती। लेकिन यह कांग्रेस की नहीं बल्कि मोदी की सरकार है। मोदी ने थोड़ा मामले को घुमा दिया है। उन्होंने मेक इन इंडिया कर दिया। भारत और फ्रांस के बीच साल भर तक इसी बात पर बातचीत होती रही कि राफेल बनाने वाली कंपनी भारत में कितने प्रतिशत पर आफसेट समझौता करेगी। मोदी सरकार की तरफ से रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर का रुख इतना सख्त था कि कई बार लगा कि मोदी के ऐलान के बाद भी ३६ विमानों का समझौता नहीं हो पायेगा। एक बार तो राफेल बनानेवाली कंपनी डसॉ एविएशन ने झल्लाहट में यहां तक कह दिया कि अगर भारत सरकार इस तरह कीमतों में कटौती करेगी तो अच्छा हो कि वह एफ-१६ की फैक्ट्री ही लगा ले। लेकिन मनोहर पर्रिकर पचास प्रतिशत आफसेट पर अड़े रहे और आखिरकार डसॉ कंपनी को उस पर सहमत होना पड़ा। मतलब समझौते के तहत भारत डसॉ कंपनी को जो सौ रूपये देगी उसमें से उसे पचास रूपये भारत में निवेश करना पड़ेगा। इस निवेश के लिए उसे भारतीय एविएशन कंपनियों से समझौता करना पड़ेगा।

इसके दो फायदे थे। पहला, भारत में डिफेन्स एविशेयन का बाजार ही नहीं बल्कि कारोबार विकसित होगा और दूसरा भारत का अधिकांश पैसा घूम फिरकर वापस भारत में ही आ जाएगा। इस तरह अगर ५९,००० करोड़ रूपया बाहर गया तो २६,००० करोड़ घूमकर फिर वापस भारत में आ जाएगा। यह वही तरीका है जो जापान सरकार इस्तेमाल करती है। जापान सरकार माल बेचकर अपनी कंपनियों के लिए बिजनेस पैदा करती है और मोदी ने माल खरीदकर बिजनेस पैदा कर लिया।

अब आप कैसे कहेंगे कि भ्रष्टाचार हुआ? जो पैसा दिया गया है उसका आधा तो भारत लौट आया। रही बात डील की तो कांग्रेस के जमाने में मेक इन इंडिया की बात हुई थी लेकिन तब राफेल बनाने का काम एचएएल करता। टीओटी होता इसलिए रेट भी कम होता लेकिन ऐसी स्थिति में जहाजों का पहला बेड़ा तैयार होने में ही एक दशक लग जाता। ऐसे पहला जहाज इस साल के आखिर तक भारतीय वायुसेना में शामिल होगा। अब जो समझौता हुआ है उससे भविष्य में न सिर्फ भारत के लिए अतिरिक्त विमान खरीदने की गुंजाइश है बल्कि भारत में वातावरण तैयार हो जाने के बाद दुनिया के दूसरे देशों के लिए एक हजार लड़ाकू विमाम बनाने की संभावना भी पैदा हो गयी है। डसॉ कंपनी की योजना है कि भारत को आधार बनाकर वह दुनिया में राफेल विमानों को बेचने की योजना पर काम करेगी। जाहिर है, इससे भविष्य में भारत के लिए एविएशन सेक्टर में संभावनाओं के नये द्वार खुलेंगे।

लेकिन इन सब बातों से अलग एक और बात है जो सबसे महत्वपूर्ण है और वह है मोदी की विश्सनीयता। कांग्रेस संसद में नहीं, गंगा में खड़ी होकर भी कहे कि मोदी ने भ्रष्टाचार किया है तो भी इस देश में कोई यकीन नहीं करेगा। आरोप लगाने से पहले कांग्रेस को चाहिए कि वह अपनी और अपने नेता की विश्वसनीयता पैदा करे। ताकि उसकी बात पर लोग भरोसा कर सकें।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

w

Connecting to %s