फोन करने पर कार्यकर्ताओं को गालियां देता है भाजपा का ये संगठनमंत्री

भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश में “बंपर” जीत हुई। लोकसभा में भी उसके बाद विधानसभा में। जिस वक्त उत्तर प्रदेश में ये चुनाव हुए उस वक्त पार्टी की तरफ से संगठन मंत्री के बतौर सुनील बंसल कार्यरत थे। उत्तर प्रदेश में हुई भाजपा की जीत का श्रेय सुनील बंसल को भी दिया गया और उनका पार्टी के भीतर ओहदा भी बढ़ा और ताकत भी।

लेकिन जैसा कि तुलसीदास कह गये हैं कि “प्रभुता पाई काहिं मद नाहिं।” यही मद इस वक्त सुनील बंसल के सिर पर सवार है। विधानसभा टिकट बंटवारे के समय भी इनकी भूमिका से पार्टी कार्यकर्ताओं में भयानक नाराजगी थी और इस वक्त तो हालत ये हो गयी है कि अगर कोई पार्टी वर्कर इन्हें फोन करे तो उसे गालियां निकालते हैं और कहते हैं कि “यूपी वाले सालों ने परेशान कर रखा है।”

इस आडियो में आगरा के एक पार्टी वर्कर मधुसूदन शर्मा ने जब मिलने के लिए समय मांगा तो सुनील बंसल ने उसे गालियां देनी शुरु कर दी। पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं की कितनी दुर्दशा है उसे यह आडियो सुनकर समझा जा सकता है।

7 thoughts on “फोन करने पर कार्यकर्ताओं को गालियां देता है भाजपा का ये संगठनमंत्री

  1. …नहिं कोउ अस जनमा जग माहीं। प्रभुता पाइ जाहि मद नाहीं॥
    (…जगत् में ऐसा कोई नहीं पैदा हुआ जिसको प्रभुता पाकर मद न हो॥)
    —रामचरितमानस 1/59/4

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  2. शैलेन्द्र कुमार सिंह भाजपा कार्यकर्ता says:

    विनाश काले विपरीत बुद्धि

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  3. गोरखपुर और फूलपुर की हार की काव्यात्मक समीक्षा।
    _______________________
    जिनका जैसा कद है देखो वैसा दाम कमाते हैं।
    सरे आम जो लूट रहे हैं हमको ज्ञान सिखाते हैं।।
    बड़े मजे में सूदखोर हैं क्या आखिर कर पाये तुम?
    कदम-कदम पर लुटती इज्जत बंद नहीं कर पाये तुम।।

    कुछ भी नहीं है बदला वही पुरानी ठेकेदारी है।
    बालू से जो क्रीम छानती नियम वही सरकारी है।
    सोच रहे थे तुम जीतोगे लील उदासी जाओगे।
    खुशियों का अम्बार लगेगा नया सबेरा लाओगे।।

    जो चुभते थे पाँव हमारे कांटों को तुम मसलोगे।
    विच्छू जैसे रेंग रहे जो डंक सभी के कतरोगे।।
    तेवर वही पुराने होंगे,सर्पों के फन कुचलोगे।
    दीन दुःखी यदि कोई होगा शंकर जैसा पिघलोगे।।

    उनका भी कुछ हिस्सा है जो केवल दरी विछाते हैं।
    मंत्री की अगवानी करके अपनी खीझ मिटाते हैं।।
    रोजगार दो उन लोगों को जो नारे रोज लगाते हैं।
    घूम-घूम कर गाँव नगर में राष्ट्रवाद समझाते हैं।

    तुम्हे मिला है मौका तो अब कोई ऐसा काम करो।
    बेईमानों की तुम कालर पकड़ो काम तमाम करो।
    इन गुण्डों और लफंगों से अब रिश्ते सारे तोड़ो तुम।
    जिनके बल पर सत्ता पाई उनसे नाता जोड़ो तुम।

    काम करोगे यदि अच्छा तो जयकार तुम्हारी होगी।
    दो हजार उन्नीस में भी फिर सरकार तुम्हारी होगी।।

    —– कवि संजीव दुबे झाँसी
    9451130619

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  4. संगठन मंत्री का ही नहीं पूरी पार्टी का गुरूर 2019मे टूट जायेगा।

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  5. सत्ता ने दिमाग का संतुलन बिगाड़ दिया है

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