रेलवे का नया कोनकोर्स

लखनऊ स्टेशन का प्रस्ताविक मॉडल जिसका भूमिपूजन हो चुका है।

कोनकोर्स भारतीय रेलवे के लिए नया शब्द है। हमारे लिए भी। लेकिन ये शब्द है क्रांतिकारी। सिर्फ एक इसी शब्द ने भारतीय रेलवे स्टेशनों के बदलाव की बुनियाद रख दी है। क्या होता है ये कोनकोर्स?

कोनकोर्स या कॉनकार्स प्लेटफार्म से अलग वह हिस्सा होता है जहां आप ट्रेन में चढ़ने से पहले पहुंचते हैं। अभी भारत के जो स्टेशन हैं उनमें स्टेशन भवन के अलावा सीधे प्लेटफार्म ही होता है जहां पहुंचकर यात्री ट्रेन में सवार भी होता है और ट्रेन लेट हो गयी तो वहीं बैठकर इंतजार भी करता है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

भारत सरकार और रेल मंत्रालय ने स्टेशनों के पुनर्निर्माण की जो प्रक्रिया प्रारंभ की है उसमें स्टेशन भवन और प्लेटफार्म के बीच कोनकोर्स का कांसेप्ट भी सामने रखा है। मतलब आप स्टेशन परिसर में प्रवेश करेंगे तो सीधे प्लेटफार्म पर जाने की बजाय प्लेटफार्म के ऊपर बने कोनकोर्स पर पहुंचेगे। यहां से आप अपनी निर्धारित ट्रेन के लिए निर्धारित समय पर ही प्लेटफार्म पर जाएंगे।

सरकार द्वारा अभी तक जितने स्टेशनों के पुनर्विकास की प्लानिंग की गयी है उसमें सबमें कोनकोर्स को स्टेशन पुनर्विकास का आधार बनाया गया है। चाहे वह भोपाल का हबीबगंज हो या गुजरात का सूरत। दिल्ली का आनंद विहार हो या फिर यूपी का लखनऊ। इन सब स्टेशनों का पुनर्विकास शुरु हो चुका है और हर स्टेशन में कोनकोर्स बनाया जाना है।

कोनकोर्स का आइडिया संभवत: मेट्रो स्टेशनों से आया है जहां यात्री को सीधे प्लेटफार्म पर जाने की बजाय पहले कोनकोर्स पर जाना होता है। कोनकोर्स का सबसे बड़ा फायदा ये है कि यात्रियों की भीड़ सीधे प्लेटफार्म पर नहीं आती बल्कि कोनकोर्स पर रहती है। यहां हवाई अड्डों की ही तरह यात्रियों के इंतजार करने की सुविधा प्रदान की जाती है कि वो घण्टे दो घण्टे रुकना चाहें तो उन्हें कोई परेशानी न हो। लेकिन इसमें एक समस्या ये जरूर आ सकती है कि अभी प्लेटफार्म पर जिस तरह से अवैध लोगों का कब्जा होता है, उससे इन कोनकोर्स को कैसे बचाया जाएगा।

खैर, यह प्रयोग क्रांतिकारी है। यह भारत के स्टेशनों को नयी परिभाषा देगा और यात्रियों को सुख सुविधा भी। मोदी की पहल पर रेलवे ने स्टेशनों के आधुनिकीकरण की जो मुहिम शुरु किया है उसमें पहला मॉडल स्टेशन हबीबगंज इस साल के आखिर तक बनकर तैयार हो जाएगा। आनेवाले सालों में भारतीय रेलवे इसी तर्ज पर अपने ६०० स्टेशनों का विकास करेगी। निश्चित रूप से यह कदम रेल परिवहन को नया आयाम प्रदान करेगा।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

w

Connecting to %s