नेहरू गांधी वंश का एडवेन्चर टूरिज्म

चौथी पीढ़ी आ गयी लेकिन नेहरु गांधी वंश का डिस्कवरी आफ इंडिया खत्म नहीं हो रहा। आप कह सकते हैं कि नेहरु गांधी वंश डिस्कवरी आफ इंडिया भारत का सबसे लंबा चलनेवाला पोलिटिकल सीरियल है। पीढ़ी दर पीढ़ी नेहरु गांधी वंश इंडिया को डिस्कवर करने में लगा है। पहले नेहरु जी ने इंडिया की खोज की, फिर इंदिरा गांधी ने, फिर राजीव गांधी ने और अब भाई बहन भारत की खोज पर निकले हैं।

इंदिरा गांधी को छोड़ दें तो राजीव गांधी और अब उनके दोनों वारिश डिस्कवरी भी नहीं कर रहे, एडवेन्चर टूरिज्म कर रहे हैं। सालों साल राजभवन के गुप्त कमरों में पलने बढ़नेवाले राजकुमार और राजकुमारी प्रजा के सामने उतना ही दिखते हैं जितना दरबारी निर्धारित करते हैं। उतना ही पब्लिक लाइफ जीते हैं जितने से प्रजा को राजा की अहमियत का अंदाजा रहे। प्रजा ज्यादा करीब आने लगती है तो अचानक पर्दे से ओझल कर दिये जाते हैं। फिर तब प्रकट होते हैं जब दरबार को जरूरत महसूस होती है।

एडवेन्चर टूरिज्म की शुरुआत राजकुमार राहुल ने की। करीब पंद्रह साल के एडवेन्चर टूरिज्म के बाद भी राजकुमार को ये समझ नहीं आया है कि आलू पेड़ पर उगता है या जमीन के नीचे। राजकुमार के एडवेन्चर टूरिज्म के बीच कभी कभी राजकुमारी प्रियंका भी एवेन्चर टूरिज्म पर निकलती हैं। वैसे तो उनका एडवेन्चर टूरिज्म अभी तक रायबरेली और अमेठी तक ही रहा है लेकिन इस बार दायरा बढ़ाकर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक कर दिया गया है। संभवत: राजकुमारी अमेठी रायबरेली के तालाब, नदी, सड़क देखकर बोर हो गयी थीं इसलिए इस बार आमचुनाव से पहले वोट के लिए बोट से गंगा दर्शन कराने का निर्णय लिया गया। राजकुमारी ने इस एडवेन्चर के दौरान कुछ जगहों पर प्रजा से किसी विदेशी सैलानी के अंदाज में संवाद भी किया और प्रजा से उनके देश के बारे में जानकारी भी इकट्ठा की।

सुना है प्रजा को राजकुमारी ने कुछ दिव्य ज्ञान भी दिया है कि कोई देश है जो खतरे में आ गया है इसलिए उन्हें घर से निकलना पड़ा है, वरना दिल्ली की आलीशान कोठियों, फार्महाउसों और एसपीजी सुरक्षा के बीच वो शुकून से जिन्दगी गुजार रही थीं। निश्चित रूप से दरबारियों की छोटी मालकिन के घर से निकलनेवाले “महान त्याग” को वंशवादी राजनीति के काले इतिहास में स्वर्णाक्षरों से लिखा जाएगा लेकिन कलंक तो उस लोकतंत्र के माथे पर है जो सत्तर साल में नेहरू गांधी वंश की गुलामी से मुक्त नहीं हो पाया है। अभी न जाने कितनी पीढ़ी तक भारत नेहरू गांधी वंश के इस एडवेन्चर टूरिज्म का दंश झेलने के लिए अभिशप्त रहेगा।

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