भारत की गुटनिर्पेक्षता नीति पर अमेरिका का अंकुश

भारत की विदेश नीति ब्राह्मणवाद के सिद्धांत पर काम करती है। वह सिद्धांत है गुट निर्पेक्षता का। किसी एक के साथ जाने में दूसरे का साथ बिल्कुल नहीं छोड़ना है। जैसे एक चतुर ब्राह्मण समाज में हर वर्ग के साथ अपने संबंध को सहज बनाकर रखता है वैसे ही भारत की विदेश नीति है। वह संसार के हर देश से अपने संबंध मधुर बनाकर रखता है। मसलन, भारत ऐसा देश है जो इजरायल और ईरान दोनों के साथ मधुर रिश्ता रखता है। भारत ऐसा देश है जो अमेरिका के जितना करीब है उतना ही करीब रूस के भी है।

जहां दो देशों के हित टकराते हैं वहां हम गुट निर्पेक्ष हो जाते हैं। इसी नीति के कारण भारत अब तक बचता आया है, बढ़ता आया है। लेकिन अब थोड़ा संकट दिख रहा है। अमेरिका का दबाव भारत पर बढ़ रहा है और पहली बार ऐसा हुआ है कि ईरान से रिश्ता रखने में हमने भारत के हित से ज्यादा अमेरिका के हित का ध्यान रखा है। ईरान से तेल आयात रोककर हम निश्चित रूप से अमेरिका और इजरायल को प्रसन्न कर लेंगे लेकिन ईरान के साथ परंपरागत संबंधों में दरार आयेगी।

हालांकि इतिहास में ईरान ने भी ऐसा किया है कि अपने हितों की रक्षा के लिए भारत को समय समय पर आंख दिखाता रहा है फिर भी संबंध कमोबेश मधुर ही रहे हैं। लेकिन अमेरिका यहीं तक रुकेगा नहीं।

अमेरिकी विदेश नीति की समस्या ये है कि वो मित्र बनाने से शुरुआत करता है और धीरे धीरे मित्र देश को अपना गुलाम बना लेता है। जो देश इससे इन्कार करते हैं उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करके उन्हें दुष्ट देश घोषित कर देता है।

अमेरिका की भारत से मित्रता की जो नयी शुरुआत हुई है उसमें अब अमेरिका भारत को गुलाम बनाने की दिशा में आगे ले जाना चाहता है। ईरान से तेल आयात पर रोक की सफलता के बाद अब रूस से एस 400 मिसाइल की खरीद पर लगाम लगाकर भारत को “गुलाम” बनाने की पहल है।

रूस के साथ भारत के ऐतिहासिक रिश्ते हैं और संकट के समय में रूस हमेशा भारत के साथ खड़ा भी रहा है। राजनय की दुनिया में रुस का चरित्र अमेरिका जैसा नहीं है। वह मित्रता में लाभ खोजता है अमेरिका की तरह लाभ के लिए मित्र नहीं बनाता। इसीलिए ब्रह्मोस और एस-400 मिसाइल डिफेन्स सिस्टम के लिए उसने भारत के साथ लाभ हानि के साथ साथ मित्रता का भी ध्यान रखा। एस-400 की डील पर भारत एडवांस स्टेज में है ऐसे में उसे निरस्त करने से भारत को न सिर्फ रणनीतिक बल्कि कूटनीतिक नुकसान भी होगा।

लेकिन भारत ने ईरान से तेल आयात रोककर तात्कालिक तौर पर आधी “गुलामी” स्वीकार कर ली है। रूस से एस 400 एन्टी मिसाइल सिस्टम की खरीद के मामले में अभी तो भारत अड़ा हुआ है लेकिन अमेरिका इतनी आसानी से शांत बैठेगा नहीं। वह कर, बल, छल सबका इस्तेमाल करेगा ताकि भारत रूस से एन्टी मिसाइल सिस्टम खरीद न सके। देखना ये होगा कि भारत की राष्ट्रवादी सरकार अमेरिका की पूरी गुलामी स्वीकार करती है गुटनिर्पेक्षता के सिद्धांत पर कायम रहती है।

One thought on “भारत की गुटनिर्पेक्षता नीति पर अमेरिका का अंकुश

  1. हिन्दी की बोलियाँ – विशाल भू-भाग की भाषा होने के कारण हिन्दी की अनेक बोलियाँ अलग-अलग क्षेत्रों में प्रयुक्त होती हैं जिनमें से विशेष उल्लेखनीय निम्नलिखित हैं- पश्चिम में हरियाणवी, खड़ी बोली, ब्रजभाषा, बुंदेली और राजस्थानी। पूर्व में अवधी, छत्तीसगढ़ी, भोजपुरी और मैथिली। उत्तर में गढ़वाली और कुमाऊँनी। दक्षिण में दक्खिनी, आदि।

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