हमारे भविष्य का "ब्ल्यूप्रिंट"

आज एक बार फिर पाण्डेय जी ने मेरे इस लेख पर सवाल उठाया है कि हमारे भविष्य का क्या ब्ल्यूप्रिंट होना चाहिए? अगर इसको विकास नहीं कहते तो विकास किसको कहोगे? यह बहुत अच्छा विषय है. मैं अपनी ओर से कुछ कहूं इससे अच्छा होगा बहुत सारे ब्लागर इस बहस में शामिल हों. आपके हिसाब … Continue reading हमारे भविष्य का "ब्ल्यूप्रिंट"

गरीबी रेखा के नीचे

जब आप किसी समस्या का अति सरलीकरण करना चाहें तो एक रेखा खींच दीजिए. समस्या वाला हिस्सा अलग हो जाएगा. फिर आप केवल उस हिस्से पर केन्द्रित हो जाते हैं जहां समस्या है. अब आप टुकड़ों में समस्या सुलझाते चले जाईये. हो सकता है किसी दिन आपको संतोष हो जाए कि आपने समस्या को न … Continue reading गरीबी रेखा के नीचे

गांव-गांव झगड़े, गांव-गांव न्यायालय

कैबिनेट का यह फैसला दो-ढाई महीने पुराना हो चुका है कि हर गांव में न्यायालय होना चाहिए. काम चल रहा है. वित्त मंत्रालय से 324 करोड़ का बजट भी ले लिया गया है. सदन की मंजूरी मिलते ही इसे आगे बढ़ा दिया जाएगा. हो सकता है अगले साल तक ऐसे ग्राम न्यायालय गांवों में दिखने … Continue reading गांव-गांव झगड़े, गांव-गांव न्यायालय

हाईड एक्ट में क्या छिपा है?

जवाहरलाल कौलहाईड एक्ट का सारांश "कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस" ने उपलब्ध करवाया है. अमेरिकी कांग्रेस पुस्तकालय द्वारा संचालित यह सेवा सरकारी उपक्रम है जो अमरीकी कांग्रेस को सेवा प्रदान करता है.विधेयक का नाम है- हेनरी जे हाईडः संयुक्त राज्य-भारत शांतिमय परमाणु उर्जा सहयोग-2006. इसमें पहले तो भारत और अमेरिका के लोकतांत्रिक हितों की समानता की बात … Continue reading हाईड एक्ट में क्या छिपा है?

आदिवासी भोले हैं, उन्हें छोड़ दो

जशपुर और दिल्ली से राकेश सिंह जशपुर में शैलेन्द्र पाण्डेय जशपुर के इस इलाके में आने के बाद लगता है गरीबी को नयी परिभाषा गढ़नी चाहिए. क्योकिं जिस परिभाषा में हम गरीबी को मापते हैं उस परिभाषा की गरीबी यहां अमीरी है. आदिवासियों तक यह बात पहुंच गयी है कि पैसा जीवन में बहुत जरूरी … Continue reading आदिवासी भोले हैं, उन्हें छोड़ दो

खुदरा व्यापार, मिथक और यथार्थ

खुदरा व्यापार पर मेरी पिछली पोस्ट के बारे में रंजन भाई ने सवालों का गुलदस्ता भेजा है. उनके सवालों का मैं आभारी हूं क्योंकि इसी बहाने मैं उन सवालों का जवाब दे सकता हूं जो अक्सर कईयों के मन में उठते हैं. पहले रंजन के सवाल -क्या रिटेल का व्यापार करना गुनाह है? गैर कानुनी … Continue reading खुदरा व्यापार, मिथक और यथार्थ

अतिक्रमण कौन कर रहा है?

यहां कुछ चित्र दे रहा हूं. कल लखनऊ में रिलांयस फ्रेश और स्पेंशर्स स्टोर के खिलाफ प्रदर्शनकारियों की तस्वीर है. पुलिस ने उनके साथ जो सलूक किया वह कई सवाल पैदा करता है. सरकार किसके लिए है? उद्योगपतियों के लिए या फिर आम आदमी के लिए? अगर आम आदमी और उद्योगपतियों के हित टकराएं तो … Continue reading अतिक्रमण कौन कर रहा है?