ग्रोथ उग्रवाद

उग्रवाद के दो प्रकार हैं. आजकल हम जिसे उग्रवाद समझ रहे हैं वह प्रतिक्रिया में पैदा हुआ है. लेकिन असली उग्रवाद वह है जो प्रतिक्रिया के लिए प्रेरित करता है. इस उग्रवाद को पिछले 200-300 सालों से व्यापार कहा जाने लगा है. आजकल पूरे भूमंडल पर इसी उग्रवाद का बोलबाला है.इन ग्रोथ उग्रवादियों का अपना … Continue reading ग्रोथ उग्रवाद

खाली पेट, भरीं पेटियां

आंकड़ो से भूख भले न मिटती हो फिर भी आंकड़े महत्वपूर्ण तो होते ही हैं. कई बार ये आंकड़े बुद्धि विलास के साधन हैं तो कई बार आंकड़े हमारे नकली चेहरों को आईना भी दिखाते हैं. आप देख सकते हैं कि सेंसेक्स 19 हजार छू गया है और इस छुअन में कई पूंजीपतियों की पेटियां … Continue reading खाली पेट, भरीं पेटियां

विकास की एक समझ ऐसी भी

साठ साला जश्न में अखबार भी तरह-तरह से प्रस्तुतियां कर रहे हैं. आईआईटी की एक रिसर्च स्कालर आदिती माहेश्वरी से यह बातचीत नवभारत टाईम्स में छपा है. पढ़कर हंसी भी आती है और रोना भी. अदिती कोई बच्ची नहीं है. वह रिसर्च स्कालर है और वह भी भारत के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी की. कल … Continue reading विकास की एक समझ ऐसी भी