तपस्या के साढ़े तीन शब्द

तपस्या कुल जमा साढ़े तीन शब्दों का योग है. लेकिन यही साढ़े तीन शब्द जब साढ़े तीन हाथ के शरीर के साथ संयोग करते हैं तो परिणाम क्रांतिकारी होते हैं. समय-समय पर कुछ पवित्र आत्माएं हमारे बीच आतीं हैं और तपस्या को युगानुकुल संदर्भों में परिभाषित कर जाती हैं. वे अपना जीवन होम करते हैं … Continue reading तपस्या के साढ़े तीन शब्द

आंसू पोछते उमर शरीफ

उमर शरीफ के बारे में मैं यहां क्यों लिख रहा हूं? सच बताऊं तो मैं भी नहीं जानता. लेकिन उमर शरीफ के प्रति बचपन से मेरे मन में एक आकर्षण है. पहली बार 10-11 साल की उम्र में मैंने उनका एक नाटक वीसीआर पर देखा था-बकरा किश्तों पर. शायद यही वह नाटक था जिसने उमर … Continue reading आंसू पोछते उमर शरीफ

इतिहासकार धर्मपाल

इतिहासकार धर्मपाल (Historian Dharampal) का जन्म जनवरी 1922 में मुजफ्फरनगर (उप्र) के एक संपन्न वैश्य परिवार में हुआ था. बचपन में ही वे महात्मा गांधी के प्रति आकर्षित हो गये, और महात्मा गांधी की सहयोगी मीरा बेन के साथ उन्होंने लंबे समय तक काम किया था. ऋषिकेश के पास पशुलोक की स्थापना में वे मीरा … Continue reading इतिहासकार धर्मपाल

गोविन्दाचार्य

संभव है कि गोविन्दाचार्य ने राजनीति में अभी अपनी निर्णायक पाली न खेली हो? नियति अचानक उन्हें कोई मौका दे और एक बार फिर आंदोलनों के उजाड़ बियाबान से निकलकर राजनीति की हरियाली में दाखिल हो जाएं. चार-पांच सालों के परिचय में उनके बारे में मेरी यही धारणा रही है कि राजनीति उनके लिए सहज … Continue reading गोविन्दाचार्य

साध्य साधन और साधना

यह उन्हीं के लेख का शीर्षक है. इस लेख को लिखते हुए वे कहते हैं यह न अलंकरण है न अहंकार. अलंकरण और अहंकार से मुक्त अनुपम मिश्र का परिचय देना हो तो प्रख्यात पर्यावरणविद कहकर समेट दिया जाता है. उनके लिए यह परिचय मुझे हमेशा अधूरा लगता है. फिर हमें अपनी समझ की सीमाओं … Continue reading साध्य साधन और साधना

विद्वता और साधना के शिखरपुरूष

हिमालय की तराई में बसे ऋषिकेश के बाहरी हिस्से पशुलोक में एक बांध बना है. बांध के पास वीरभद्र रोड पर दर्जनों कुटियों का समूह दिखता है. मुख्य सड़क से अंदर जाने के लिए एक पगडंडी बनी है. पगडंडी आपको जहां पहुंचाती है उसका नाम है स्वामी राम साधक ग्राम. इन्हीं कुटियों में से एक … Continue reading विद्वता और साधना के शिखरपुरूष

बजरंगलाल छत्तीसगढ़वाले

बजरंगलाल दो साल से दिल्ली में ही रहते हैं. हालांकि उन्होंने अब वानप्रस्थ ले लिया है इसलिए उनका नया नाम बजरंगमुनि है फिर भी मैं उन्हें बजरंगलाल ही कहता हूं और उनको इस पर कोई ऐतराज नहीं होता. अब वे दिल्ली रहकर ही लोक स्वराज्य मंच के काम को आगे बढ़ाना चाहते हैं. लगभग दो … Continue reading बजरंगलाल छत्तीसगढ़वाले